बलौदाबाजार: 20 जनवरी 2026
श्री हरिद्वार के साथ मेरा क्षणिक संपर्क 2017 में भाटापारा में हुआ । रुचियाँ मिलती थी, अतः वर्ष ने दो तीन बार बात होती रहती थी । मुम्बई से छत्तीसगढ़ प्रवास के तारतम्य में एकाध भेंट आगे भी हुई । हरिद्वार का अपना संघर्ष था और मेरी अपनी, अतएव विचार यह बना कि थोड़ा अच्छा समय बलौदाबाजार में बिताया जाए जहां अब हरिद्वार पीएचडी कर रहे हैं ।
20 जनवरी भोर 6.30 रायपुर से ट्रेन से भाटापारा, फिर 45 मिनट की बस यात्रा से बलौदा पहुंचना सरल था । हरिद्वार मिले, और सबसे पहली भेंट श्री मनीष जी के साथ हुई । बातचीत इतनी सहज हो गई कि वे अगले कार्यक्रम के लिए भी साथ हो लिए ।
हम जिला ग्रंथालय पहुंचे । थोड़ा अधिकारिक परिचय, थोड़ी औपचारिकता के बाद, सामने था लगभग 50 युवाओं का समूह – खिले हुए उत्सुक चेहरे ! चर्चा चली, तो चल पड़ी । वीडियो नीचे है ।
बलौदाबाजार प्रवास से 3 निष्कर्ष पुष्ट हुए –
- छोटे नगर में जीवन जीवित है, आत्मीयता जीवित है । जीवन अर्थात अपने लिए, अपनेपन के लिए समय होना – महानगर में अवसर अवश्य हैं, किन्तु जीवन में जीवंतता की कुछ सीमाएँ हैं । सम्पर्क क्रान्ति के साथ छोटे नगर की जीवनशैली भी बहुत संतोषजनक हो सकती है । भारतवर्ष का नया स्वरूप छोटे शहर ही निर्धारित करेंगे, महानगर नहीं ।
- जनसामान्य, विशेषतः नवयुवा वर्ग अच्छा मार्गदर्शन ना मिलने के कारण भ्रमित हो सकता है । औपचारिक शिक्षा और सुरक्षित नौकरियों के पीछे भागने की प्रवृत्ति से बात बन नहीं रही है । व्यथा, कुंठा, निराशा, भ्रम – इन सब के कारण अनेक दशकों का समय व्यर्थ हो जाएगा, जिसे “डेमोग्राफिक डिविडेंड” कहते हैं, वह हाथ से चला जाएगा ।
- औपचारिक शिक्षा तंत्र को नए विचार के लिए खुला मन और नए दृष्टिकोण अपनाने के लिए उत्सुकता बनाए रखना आवश्यक है, “ज्ञान होने का अहंकार” (academic ego) सामाजिक पतन का कारण बनेगी क्योंकि शिक्षा का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य होता है समाज का निर्माण करना, चरित्र का निर्माण करना ।
Memories
Received precious book by Dr. Yogita Bajpai
Dr. Arvind Agrawal at Balaudabazar, Chhattisgarh
Bright youngsters, Future of Bharat
Links Mentioned
- Awareness Course on Six Critical Life Positions
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